Guru Mahima
सनातन धर्म के उद्धारक और परशिव के अवतार, जगद्गुरु श्री शंकराचार्यजी द्वारा स्थापित दक्षिणाम्नाय श्रींगेरी शारदापीठ के छत्तीसवें अधिपति, हमारे परमपूज्य गुरुदेव अनंतश्रीविभूषित जगद्गुरु श्री श्री भारती तीर्थ महास्वामी महाराजजी की महिमा अपरंपार है। कठोर कलियुग में भी, वे अपने असाधारण शास्त्र पाण्डित्य, सम्प्रदाय निष्ठा, और शिष्यों पर अहेतुक दया जैसे सद्गुणों से बड़े-बड़े पंडितों को चकित कर देते हैं। अनेक भक्तों ने उनके दिव्य अनुग्रह का अनुभव प्राप्त किया है, जिनमें से कुछ अनुभव "गुरुमहिमै" नामक पुस्तक में संग्रहित हैं, जिसे कुछ साल पहले सेलम के मृगशीर्ष कमिटी द्वारा तमिल भाषा में प्रकाशित किया गया था। अब उसी पुस्तक का हिंदी में अनुवाद प्रकाशित किया गया है, जिससे और भी लोग उनके अद्भुत अनुभवों और महिमा से परिचित हो सकें।
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सनातन धर्म के उद्धारक और परशिव के अवतार, जगद्गुरु श्री शंकराचार्यजी द्वारा स्थापित दक्षिणाम्नाय श्रींगेरी शारदापीठ के छत्तीसवें अधिपति, हमारे परमपूज्य गुरुदेव अनंतश्रीविभूषित जगद्गुरु श्री श्री भारती तीर्थ महास्वामी महाराजजी की महिमा अपरंपार है। कठोर कलियुग में भी, वे अपने असाधारण शास्त्र पाण्डित्य, सम्प्रदाय निष्ठा, और शिष्यों पर अहेतुक दया जैसे सद्गुणों से बड़े-बड़े पंडितों को चकित कर देते हैं। अनेक भक्तों ने उनके दिव्य अनुग्रह का अनुभव प्राप्त किया है, जिनमें से कुछ अनुभव "गुरुमहिमै" नामक पुस्तक में संग्रहित हैं, जिसे कुछ साल पहले सेलम के मृगशीर्ष कमिटी द्वारा तमिल भाषा में प्रकाशित किया गया था। अब उसी पुस्तक का हिंदी में अनुवाद प्रकाशित किया गया है, जिससे और भी लोग उनके अद्भुत अनुभवों और महिमा से परिचित हो सकें।
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सनातन धर्म के उद्धारक और परशिव के अवतार, जगद्गुरु श्री शंकराचार्यजी द्वारा स्थापित दक्षिणाम्नाय श्रींगेरी शारदापीठ के छत्तीसवें अधिपति, हमारे परमपूज्य गुरुदेव अनंतश्रीविभूषित जगद्गुरु श्री श्री भारती तीर्थ महास्वामी महाराजजी की महिमा अपरंपार है। कठोर कलियुग में भी, वे अपने असाधारण शास्त्र पाण्डित्य, सम्प्रदाय निष्ठा, और शिष्यों पर अहेतुक दया जैसे सद्गुणों से बड़े-बड़े पंडितों को चकित कर देते हैं। अनेक भक्तों ने उनके दिव्य अनुग्रह का अनुभव प्राप्त किया है, जिनमें से कुछ अनुभव "गुरुमहिमै" नामक पुस्तक में संग्रहित हैं, जिसे कुछ साल पहले सेलम के मृगशीर्ष कमिटी द्वारा तमिल भाषा में प्रकाशित किया गया था। अब उसी पुस्तक का हिंदी में अनुवाद प्रकाशित किया गया है, जिससे और भी लोग उनके अद्भुत अनुभवों और महिमा से परिचित हो सकें।























